इतिहास की मेज पर भूगोल का दर्द
नये भारत की कल्चरल डिप्लोमेसी
भारतीय संस्कृति में ‘प्रणाम’ केवल अभिवादन की औपचारिक क्रिया नहीं अपितु एक ऐसी जीवन-दृष्टि है जो व्यक्ति को व्यक्ति से, पीढ़ी को पीढ़ी से और समाज को उसके मूल्यों से जोड़ती है। प्रणाम का अर्थ है अपने अहं का क्षय कर दूसरे के अस्तित्व, अनुभव और गरिमा को स्वीकार करना।
ताकि सनद रहे
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प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का पिछले 12 वर्षों का कालखंड केवल शासन या सत्ता परिवर्तन का गवाह नहीं रहा बल्कि यह राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर उभरा है। इस अवधि ने भारत के सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक स्वरूप को तो संवारा ही है। लेकिन सबसे गहरा और अमिट प्रभाव भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परिदृश्य पर छोड़ा है।
विज्ञान और कला का अद्भुत मिश्रण है दंत चिकित्साः डॉ. संजय लाभ